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माँ की संतान को शिक्षा

नौनिहालों की उन्नति हेतु उनमें प्राण फूंकने की कला बच्चों का मन बड़ा कोमल और ग्रहण शील होता है । उस आयु में पड़नेवाले संस्कार अमिट हो जाते हैं । बड़े हो जाने के बाद Read more…

माँ द्वारा भगवद्संस्कार

बचपन के संस्कार ही जीवन का मूल सन् १८९३ में गोरखपुर (उ.प्र.) में भगवती बाबू एवं ज्ञान प्रभा देवी के घर एक बालक का जन्म हुआ, नाम रखा गया मुकुंद । मुकुंद के माता-पिता ब्रह्मज्ञानी Read more…

मातायें ध्यान दें

प्यार से पोषण करें सदगुणों का महात्मा हरिद्रुमत गांधार देश की ओर जा रहे थे । मार्ग में एक ऐसा गाँव पड़ा जहाँ सभी लोग बूढ़े, जवान, स्त्रियाँ और बच्चे भी भगवान को प्रेम करने Read more…

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